सफल और खूशहाल वैवाहिक जीवन की चाबी

सफल और खूशहाल वैवाहिक जीवन की चाबी

वैवाहिक जीवन की सफलता अच्छे संबंध बनाने से होती है। विश्व शक्ती से संपर्क बनाईए फिर दो विभिन्न व्यक्तीयों के बीच का रिश्ता भी अपने आप सही दिशा में बढने लगेगा।

– मानव गुरु श्री चंद्रशेखर गुरुजी

यशस्वी वैवाहिक जीवन वो है जब दो अजनबी एक साथ आते है और एक रिश्ते में एकसाथ रहते और बढते है। सफल और लंबे समय तक चलनेवाला रिश्ता बनाने के लिए इसे दिल से निभाना जरूरी है। जीवन में तकलीफे भी आएँगी और ज़रूरी नहीं है की हर दिन खुशियों भरा और आनंदमय होगा। निर्णय लेने होंगे और संयुक्त कुटुंब के सदस्यों से मिलना और बातचीत करना होगा। जीवन उम्मीदों, दबाव भरे क्षणों और ऊर्जा, समय, धन की ज़रूरतों के पलों से भरा होगा। इसके लिए जरुरी है, पति-पत्नी का एक दूसरे को समझना और एक दूसरे के लिए समझौते करना।

वो कौनसे घटक है जो सुखी वैवाहिक जीवन के स्थिरता पर प्रभाव डालते है?

  • प्यार और प्रतिबद्धता – प्रेम अल्पकालिक हो सकता है और साथ रहने की प्रतिबद्धता लंबे समय तक रहती है और यही रिश्ते की आवश्यकता है।
  • विश्वसनीयता – यह सभी स्तर पर महत्वपूर्ण है जैसे वफादार होने के लिए, आर्थिक रुप से प्रामाणिक रहने के लिए और इमानदारी से संवाद बनाए रखने के लिए।
  • धैर्य, स्वीकार और आदर का मनोभाव- रिश्ते में साथी को उसकी खामियों के साथ स्वीकार करना महत्वपूर्ण है। व्यक्ती से ज्यादा रिश्ते को अहमियत देना।
  • वक्त – साथ में अच्छा समय बिताना यह रिश्तों में गहराई लाने में मदत करनेवाला सबसे अच्छा तरीका है।
  • ईमानदारी और विश्वास – ईमानदारी और विश्वास को अपने रिश्ते में अपनाना चाहिए और उसका परिणाम आपको ज़रूर दिखाई देगा।
  • संवाद – छोटी-छोटी चीजों से लेकर, बडे से बडे विषयों की सूची बनाकर सभी चीजों पर चर्चा होना जरुरी है। ज़्यादा समय तक एक दूसरे से नाराज़ मत रहिये। भावनाए, संदेह, भय, विचारों, विश्वासों, मूल्यों, आशाओं, चिंताओं, आशंकाओं, सपनों, महत्वाकांक्षाओं के बारे में खुलकर बात करे।
  • निस्वार्थता- साझा करना ही देखभाल करना है। उम्मीद दो, एकसाथ सपने देखो और उन्नती और खुशियों से भरा हुआ जीवन जीने की कोशीश करो। किस चीज को लेकर समस्या निर्माण हो रही है उसे और उसके कारण को समझो और उसपर काम करो।
  • एक दुसरे की बात ध्यान से सुनना – उपेक्षा, असहमती, आंकना, दोषारोपण और आलोचना करने की बजाय एक दुसरे की बातों को ध्यान से सुने जिससे भावनात्मक नजदीकियां बढेगी, एक दुसरे को जानेंगे और समझेंगे।

बरताव, वैचारिक प्रक्रियाए और जीवनशैली में बुनियादी बदलावों के अलावा, सफल वैवाहिक जीवन के लिए सकारात्मक बातचीत, आपसी सम्मान और एकसाथ जीवन बिताने का वायदा, इन सब की जरुरत होती है। यह किसी भी भावनात्मक उथल-पुथल के बिना एक सरल प्रभावी संबंध की दिशा में काम करने के बारे में है।

आशा है कि आपने उन कारकों को पढा होगा जो एक सफल विवाह को बनाए रख सकते है। आपको क्या लगता है, यह सभी बताये हुए समाधानों को हर दिन बनाए रखना कितना आसान है?

बहुतसे विशेषज्ञ लेखकों और पुस्तकों ने उन्हें बार-बार अत्याधिक अनुशंसित किया है। दुनिया भर की पीढियों ने युगल लक्ष्य निर्धारित करके इन कारकों को लागू किया लेकीन फिर भी उन्होंने परिणाम के साथ केवल संघर्ष का अनुभव किया है। शादी की समस्या का समाधान पारस्पारिक रुप से करना होगा।

एक खुशहाल विवाह के लिए जो उपाय बताए है उन्हे जबरदस्ती करवाया नहीं जा सकता क्योंकि सभी की अपनी विकास अवधि होती है। जब पती-पत्नी के बीच संबंध में कलह होता है तो प्रतिक्रियाशील मन दैनिक दिनचर्या पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकता है।

उदाहरण: यदि किसी डॉक्टर के वैवाहिक जीवन में थोड़ी परेशानी होती है,लेकिन उसे महत्वपूर्ण चिकित्सा आपात स्थिति में जाना पड़ता है, यहाँ स्थिति बताती है की डॉक्टर को अत्यंत एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करना होगा, लेकिन उनकी मनोदशा उदास होगी और उर्जा कम होगी।

जीवन अप्रत्याशित है और दैनिक जीवन और इसकी चुनौतीयां रास्ते में आ जाती है। और एक दुसरे से आगे बढने की चिंता, कभी-कभी रिश्ते के पक्ष में ना जाकर उसे पीछे रखता है।

अगली सबसे अच्छी विधि, साथी के विशेष व्यवहार के मूल कारण को समझना है।

मानव गुरु के अनुसार, वैवाहिक जीवन में समस्याए निर्माण होने का मुख्य कारण मन, शरीर और आसापास के स्थानों का विश्व शक्ती से संपर्क टूटना है।

मानव गुरु सन 2000 से अपने दिव्य ज्ञान के माध्यम से लोगो का संपर्क विश्व शक्ति से बनाकर दे रहे है। जो 9 से 180 दिनों में यशस्वी वैवाहिक जीवन का मार्ग दर्शता है।

जब रिश्तों की बात आती है; केवल मन और शरीर का इलाज करना और आसपास की जगह और विश्व शक्ती की उपेक्षा करना एक सुखी वैवाहिक जीवन को बनाने में मदद नहीं करेगा।

एक स्थायी समाधान प्राप्त करने और वैवाहिक जीवन की समस्याओं से बचने के लिए; शरीर, आसपास की जगह और विश्व शक्ती इन तीनों का संपर्क में आना ज़रूरी है। जब तक कि इन तीन स्वतंत्र तत्वों के बीच तालमेल न हो जाए, वे एक नहीं हो सकते।

जब संपर्क किया जाता है, तो युगुल आश्चर्यचकित होकर विश्वास ही नहीं कर पा रहे थे की आखिर इस पद्धति ने उनके जीवन में कितनी तेज़ी से प्रभाव किया है।

मानव गुरु का दिव्य ज्ञान वैज्ञानिक तौर पर कैसे काम करता है?

  • हर एक मानवी शरीर में उत्पन्न होनेवाली उर्जा के अपने कंपनीय तरंग होते है
  • वो स्थान जहाँ वे रहते/कार्य करते है उसकी भी अपनी उर्जा और उसके अपने कंपनीय तरंग होते है।
  • वैसे ही, विश्व शक्ती के भी अपने कंपनीय तरंग होते है।

जब वैवाहिक साथी, वे स्थान जहां वे रहते या काम करते है संबंधित कंपनीय तरंगों के माध्यम से विश्व शक्ती के संपर्क में आते है; तब विश्व शक्ती स्वचालित रूप से शरीर में प्रसारित हो जाती है।

विश्व शक्ती अभिभावक की तरह काम करती है और मन और शरीर पर नियंत्रण का प्रबंधन करती है। एक बार ऐसा होने पर, जीवन का अगला चरण एक परिवर्तन से गुजरता है और आप 9 से 180 दिनों के भीतर अपने दर्द के स्तर में सकारात्मक बदलाव का अनुभव करना शुरू कर देंगे।
यह समर्थन सुनिश्चित करता है कि पति और पत्नी को अपने सम्बन्ध में समस्याओं के मूल कारणों को समझने की आदत पड जाएगी और उन्हें अधिक सकारात्मक और सफलतापूर्वक संबोधित करना शुरू कर देंगे।

यह विश्व शक्ती शांती, स्पष्टता और एक साथ चर्चा करके समाधान पर पहुँचने के लिए एक माहौल लाती है और भविष्य में अधिक बाधाओं को उत्पन्न होने से भी रोकती है। जीवन तब और अधिक आरामदायक और प्रबंधनीय हो जाएगा।

सारांश: शादियां एक बहुत ही प्यारा बंधन होती है और अगर सही तरीके से नहीं संभाला जाए तो दिल टूटने और घरपर नकारात्मक माहौल पैदा करने का कारण बन सकती है।
मानवगुरु का दिव्य ज्ञान, अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए एक संपूर्ण समाधान है और इस संबंध को देखने के तरीके को बदलने में मदद कर सकता है और साथी के बीच बेहतर स्वीकृति और जुड़ाव लाता है। प्रत्येक जोड़े को एक बार मानवगुरु के दिव्य ज्ञान को अपनाना चाहिए और केवल 9 से 180 दिनों में सकारात्मक परिवर्तनों का अनुभव करना चाहिए।

 मानव गुरु

मानव गुरु

अपने दिव्य ज्ञान के द्वारा लाखों परिवारों की जिंदगी को 9 से 180 दिन में परिवर्तन करवाया है।

Facebook Twitter Instagram Linkedin Youtube