विश्व शक्ति की गोपनीय चाबी है अंक ‘9’

हर एक व्यक्ती, प्राणी, पक्षी, वृक्ष, नदी, समुद्र, पर्वत, पृथ्वी, आकाश और सभी सजीव और निर्जीव वस्तु अस्त्तित्व में आने का कारण है उर्जा। हम इस उर्जा को विश्व शक्ति संबोधित करते है।

विश्व शक्ति हर जगह है किंतु हम उसे देख नहीं सकते। ना उसे निर्माण कर सकते है ना ही नष्ट कर सकते है। हम हमेशा उससे घिरे हुए होते है।

हर एक व्यक्ति की उनकी जन्म तारीख के अनुसार 4 उच्च कंपन तरंग और 4 निम्न कंपन तरंग होती हैं।

उसी तरह विश्व शक्ति की भी अपनी विशिष्ट कंपन तरंग होती है। अंक ‘9’ यह विश्व शक्ति की विशिष्ट कंपन तरंग है।

अब आप सोच रहे होंगे की अंक ‘9’ यह विश्व शक्ति का विशिष्ट कंपन तरंग क्यों है? हम आपको यह विस्तार से स्पष्ट समझाते है।

हम तरंग को ‘हर्ट्झ’ इस इकाई में नापते है।
मिसाल के तौर पर
तरंग = चक्र/सेकंड

एक चक्र 360˚ का होता है।
इसका मतलब होता है
तरंग = 360˚/ सेकंड

यदि हम वृत्त के बारे में सोचे तो एक वृत्त 360˚ का बना हुआ है।
और जब हम दिशादर्शक यंत्र का विचार करते है तो यह अंश अलग-अलग दिशा दर्शाते है।

  • 45˚ ईशान्य दिशा दर्शाती है
    45 = 4+5 = 9
  • 90˚ पूर्व दिशा दर्शाती है
    90 = 9+0 = 9
  • 135˚ आग्नेय दिशा दर्शाती है
    135 = 1+3+5 = 9
  • 180˚ दक्षिण दिशा दर्शाती है
    180= 1+8+0 = 9
  • 225˚ नैऋत्य दिशा दर्शाती है
    225 = 2+2+5 = 9
  • 270˚ पश्चिम दिशा दर्शाती है
    270 = 2+7+0 = 9
  • 315˚ वायव्य दिशा दर्शाती है
    315 = 3+1+5 = 9
  • 360˚ उत्तर दिशा दर्शाती है
    360 = 3+6+0 = 9

जैसा की पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है, हर एक व्यक्ति की उनकी जन्म तारीख के अनुसार, चार उच्च कंपन तरंग और चार निम्न कंपन तरंग होती है।

नीचे मिसाल के तौर पर एक व्यक्ति के जन्म तारीख के अनुसार उनकी उच्च और निम्न कंपन तरंग दिए हुए है।

4 उच्च
कंपन तरंग

135˚ (आग्नेय)


90˚ (पूर्व)


180˚ (दक्षिण)


360˚ (उत्तर)

4 निम्न
कंपन तरंग

225˚ (नैऋत्य)


315˚ (वायव्य)


45˚ (ईशान्य)


270˚ (पश्चिम)

जब हम 4 उच्च कंपन तरंगों का एक-एक कर के विचार करते है तो कुछ रोचक तथ्य हमारे सामने आते है:

1. 135˚ = 1+3+5 = 9
2. 90˚ = 9+0 = 9
3. 180˚ = 1+8+0 = 9
4. 360˚ = 3+6+0 = 9

उसी तरह जब हम 4 निम्न कंपन तरंगो का एक-एक करके विचार करते है तो हमें ज्ञात होता है:

1. 225˚ = 2+2+5 = 9
2. 270˚ = 2+7+0 = 9
3. 45˚ = 4+5 = 9
4. 315˚ = 3+1+5 = 9

यह वृत्त के बारे में कुछ तथ्थ्यात्मक जानकारी है। उसी तरह इस विश्व में जो भी आकार है वह ‘9’ अंक से बने हुए है।

चौरस और आयात:
त्रिकोण
पंचकोण
षटकोण:

इसी तरह आकारों के अलावा आपको करीब-करीब सभी चीजों में ‘9’ अंक का महत्व दिखाई देगा।

मिसाल के तौर पर:

    • एक माँ अपने बच्चे को 9 महीने तक पालती है
    • मनुष्य में 9 भावनाएं होती है प्रेम, मस्ती, दुःख, क्रोध, शौर्य, भय, घृणा, आश्चर्य और शांती
    • यह 9 भावनाएं भारतीय कला प्रकारो में भी मिलती है उन्हें नाट्यशास्त्र के अनुसार ‘नवरस’ कहते है।
    • वहां 9 मुल्यवान रत्न होते है उन्हें नवरत्न कहां जाता है वो इस प्रकार है: माणिक, हीरा, नीलम, पुखराज, पन्ना, लाल मूंगा, मोती, वैदूर्य, गोमेद

‘9’ इस अंक का महत्व अलग-अलग धर्मों में भी मिलता है:

  • इस्लाम के अनुसार, कुरान रमजान के पवित्र महीने के 27 वे दिन पर पूरा हुआ है।
    i.e. 2+7 = 9
  • कुरान के अनुसार, अल्लाह के 99 नाम है
    i.e. 9+9 = 18
    18 = 1+8 = 9
  • बौद्ध धर्म में पाली भाषा में भगवान बुद्ध के 9 गुणों का वर्णन दिया हैः
    1. अरहम
    2. सम्मासबुद्धों
    3. विज्जाचरणसंपन्नो
    4. सुगतो – उदात्त
    5. लोकविदू
    6. अनुत्तरोपुरीसधम्मसारथी
    7. सत्ता देवमनुसान्न
    8. बुद्धों
    9. भगवा
  • ईसाई धर्म में पवित्र आत्मा के 9 फल होते है प्रेम, आनंद, शांति, संयम, दया, अच्छाई, विश्वास, सभ्यता और आत्म – संयम
  • हिंदू धर्म में:
    • हिंदुओं में इस्तेमाल की जाने वाली रुद्राक्ष की माला 108 मणिओं की होती है
      i.e. 108 = 1+0+8 = 9
    • भगवद्ग गीता में मानवी शरीर का वर्णन ‘नवद्वारपूर’ (नौ दरवाजों का शहर) किया गया है। यह द्वार 2 आंखे, 2 नासिकाएं, मूंह, 2 कान और शरीर के मल-मूत्र को बाहर फैंकने के लिए दो द्वार
    • नवरात्रि त्यौहार देवी दुर्गा की पूजा करने के लिए 9 दिन मनाया जाता है। इन 9 दिनों के दौरान 9 दिन उपवास/व्रत किए जाते है।
    • हिंदू विश्वउत्पत्ती शास्त्र के अनुसार कुल चार युग है वो कृत (सत) युग, त्रेता युग, द्वापर युग, और कलि युग। प्रत्येक युग कुछ निश्चित वर्षों के बाद खत्म हो जाता है।

1. कृत (सत) युग = 1440000 वर्ष
 1440000 = 1+4+4+0+0+0+0 = 9

3. द्वापर युग = 720000 वर्ष
 720000 = 7+2+0+0+0+0 = 9

2. त्रेता युग = 1080000 वर्ष
 1080000 = 1+0+8+0+0+0+0 = 9

4. कलि युग = 360000 वर्ष
 360000 = 3+6+0+0+0+0 = 9

यही नहीं हम देखते है विश्व शक्ती की कंपन तरंग के बारे में संगीत में भी चर्चा की गयी है:

  • 1 Hz = 1 X 360˚ = 360
    360 = 3+6+0 = 9
  • 15 Hz = 15 X 360˚ = 5400
    5400 = 5+4+0+0 = 9
  • 432 Hz = 432 X 360˚ = 155520
    155520 = 1+5+5+5+2+0 = 18
    18 = 1+8 = 9
  • 528 Hz = 528 X 360˚ = 190080
    190080 = 1+9+0+0+8+0 = 18
    18 = 1+8= 9
  • 963 Hz = 963 X 360˚ = 346680
    346680 = 3+4+6+6+8+0 = 27
    27 = 2+7 = 9

इससे हम ऐसा निष्कर्ष निकाल सकते है की प्रत्येक सजीव और निर्जीव वस्तू ‘9’ अंक से संबंधित है।

उसी तरह विश्व शक्ति की भी अपनी विशिष्ट कंपन तरंग है। विश्व शक्ति की विशिष्ट कंपन तरंग 9 है। .

प्रत्येक व्यक्ति की खूद की 4 उच्च कंपन तरंग होती है, जो उनके घर और काम की जगह पर भी लागू होती है, जो 9 ही होती है।
मिसाल के तौर पर:
135 = 1+3+5 = 9
90 = 9+0 = 9
180 = 1+8+0 = 9
360 = 3+6+0 = 9

प्रत्येक व्यक्ति को उनके घर और कार्यस्थल के अनुसार उनकी उच्च कंपन तरंग के साथ विश्व शक्ति के संपर्क में आना जरूरी है।

जब यह होगा, विश्व शक्ती व्यक्ति के शरीर में और उनके घर /कार्यस्थल पर संचलित होना शुरू हो जाती है। इसके परिणाम स्वरुप उस व्यक्तिके जीवन में सकारात्मक बदलाव होने लगते है और वो उनके जीवन में वो सब कुछ प्राप्त करने के लिए शुरु हो जाता है जो वो चाहते है, वो भी सिर्फ 9 से 180 दिनों में।

मानव गुरु ने बताए हुए 4 उच्च कंपन तरंग आपको विश्व शक्ति से संपर्क बनाने में मदद करेंगे और आपकी जिंदगी में निश्चित रुप से अच्छे बदलाव लाएंगे।

क्या आप आपके जीवन में 4 उच्च कंपन तरंग और 4 निम्न कंपन तरंग के बारे में जानकर निश्चित बदलाव लाना चाहते है?
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